इंडिया गठबंधन सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाएगा

विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, विपक्षी दल वोटर लिस्ट में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ यानी एसआईआर और ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर सीईसी के बयान पर अपना विरोध जताने के लिए ऐसा कर रहे हैं। यह निर्णय कथित तौर पर राज्य सभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में हुई ‘इंडिया’ गठबंधन के फ्लोर लीडर्स की बैठक में लिया गया।संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल उसी तरह से हटाया जा सकता है, जैसे कि सुप्रीम कोर्ट के जज को, जिसके लिए संसद में महाभियोग प्रस्ताव की आवश्यकता होती है।

सोमवार को इंडिया गठबंधन के सांसदों की बैठक में इस बारे में सहमति बनी। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार गुप्ता और विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक के बीच टकराव और तेज हो गया है। इंडिया गठबंधन ने उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने पर गंभीर चर्चा शुरू कर दी है।

दरअसल, ज्ञानेश कुमार ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से कहा था कि वह अपने “वोट चोरी” के आरोपों को शपथपत्र के जरिए साबित करें या फिर पूरे देश से माफी माँगें। सीईसी ज्ञानेश ने राहुल का नाम लिए बिना यह धमकी दी थी। उनके कहने का अंदाज आपत्तिजनक था।

जानकारी के मुताबिक, यह प्रस्ताव सोमवार 18 अगस्त की सुबह इंडिया गठबंधन की बैठक में रखा गया, जहाँ सभी दलों ने इसे मंजूरी दी। एक विपक्षी नेता ने मीडिया से कहा कि सभी सदस्य सहमत हैं और अब जल्द ही इसके कानूनी पहलुओं पर चर्चा की जाएगी। नेता के मुताबिक, “यह प्रक्रिया जज के महाभियोग जैसी ही होगी।”

विपक्षी दलों ने यह भी फैसला लिया है कि वे लोकसभा में अंतरिक्ष यात्री सुभांषु शुक्ला के स्पेस मिशन पर होने वाली विशेष चर्चा में हिस्सा नहीं लेंगे। संसद में इस पर दो दिन की विशेष चर्चा तय है, लेकिन विपक्ष ने साफ कहा है: “हम इस चर्चा का हिस्सा नहीं होंगे और अपना विरोध जारी रखेंगे।” क्योंकि विपक्ष वोट चोरी और बिहार एसआईआर पर चर्चा चाहता है लेकिन मोदी सरकार इस पर चर्चा नहीं होने दे रही है। संसद के दोनों सदनों में विपक्षी सांसदों ने जब बिहार एसआईआर का मुद्दा उठाना चाहा, बीजेपी के सांसदों ने शोर मचाकर उन्हें चुप करा दिया और हंगामे के बीच संसद स्थगित कर दी जाती है।

रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीईसी ज्ञानेश कुमार गुप्ता ने चेतावनी दी कि अगर राहुल गांधी सात दिनों के भीतर शपथपत्र नहीं देते, तो उनके “वोट चोरी और चुनावी धांधली” के आरोप “झूठे और अमान्य” माने जाएँगे। इसके जवाब में राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उनका आरोप है कि भाजपा के नेतृत्व वाली मोदी सरकार ने 2023 में ऐसा कानून पास किया, जिसके चलते चुनाव आयोग के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती। “यह सरकार चुनाव आयोग की रक्षा कर रही है, क्योंकि आयोग खुद भाजपा की मदद कर रहा है और मिलकर वोट चोरी में शामिल है।”

औरंगाबाद की सभा में राहुल का सवाल 

अपने वोटर अधिकार यात्रा के पहले दिन औरंगाबाद में सभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा: “आज चुनाव आयोग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। मैं उनसे पूछना चाहता हूँ कि चुनाव प्रक्रिया में सीसीटीवी फुटेज के नियम क्यों बदले गए? क्या आपको (जनता) पता है कि अब चुनाव आयुक्तों के खिलाफ किसी भी अदालत में केस दर्ज नहीं किया जा सकता?” औरंगाबाद में राहुल ने यह भी कहा कि वो खुद या तेजस्वी और पूरा बिहार चुनाव आयोग की धमकी से नहीं डरते।

इससे पहले 8 अगस्त की प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने कर्नाटक की एक सीट महादेवापुरा के आंकड़े दिखाते हुए आरोप लगाया था कि वहाँ 1,00,250 वोट चोरी हुए। उनके मुताबिक: 11,965 डुप्लीकेट वोटर थे 40,009 के नकली और अमान्य पते वाले थे 10,452 लोग। एक ही पते पर bulk voters थे 4,132 वोटर अमान्य फोटो के साथ थे और 33,692 वोटर ने Form 6 का दुरुपयोग करके वोट डाला था।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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